Hindi poetry_कैसे / Kaise_Ankit AKP_2018

1544333060834कैसे मैं खुद को बतलाऊँ
कि क्या हूँ मैं
कैसे इस जहान में
अपनी पहचान बनाऊँ मैं
कैसे उस मंजिल तक जाऊँ
जो लक्ष्य है मेरी जिन्दगी का
कुछ तो खास है मुझमें
कैसे यह खुद को विश्वास दिलाऊँ;
हर राह पर हो ईश्वर साथ मेरे
कैसे यह यह उम्मीद जताऊँ मैं
जिस भी राह पर जाऊँ,
वहाँ कदमों के निशान हो मेरे
कैसे यह ख्वाब सजाऊँ मैं
कभी मैं भी परिन्दा बनकर,
आसमान की ऊँची उड़ान भरूँ
कैसे यह ख़्वाहिश जताऊँ मैं
हाथ की लकीरें किस्मत और,
बंद मुट्ठी ताकत है मेरी
कैसे इस तरह आत्मविश्वास बढ़ाऊँ मैं;
आखिर कैसे अपने अन्दर की,
उस काबिलियत को पहचानुँ मैं
कि कभी भी मेरे मन में,
‘कैसे’ शब्द का ख्याल न आए
क्योंकि ‘कैसे-कैसे’ कहकर बस,
बहुत कर लिए खुद से सवाल मैंने
लेकिन कैसे भी था करना अब,
अपने से ये ‘कैसे’ दूर
क्योंकि अब मुझे अपने आप को,
सिर्फ जवाब देने थे !
#AnkitAKP #AnkitKumarPanda

Advertisements

वो, उसका मुखड़ा और मेरा इश्क /Woh, Uska Mukhda aur Mera Ishq _ Hindi love poetry or shayari

आजकल वो जैसे मेरे,
गीतों का सुर बांधती है
गले में जैसे मेरे,
सरस्वती बन विराजती है;
मेरी हर बातों, हर शब्दों में मेरे,
बस वही मिठास लाती है
एक वही तो है जो बोली से मेरे,
मेरी अलग ही पहचान कराती है
और लोगों में मुझको खास बनाती है;
वो कुदरत का एहसास कराती है,
जिन्दगी जन्नत कर जाती है
जिन्दगी के हर दुखड़ाें में वो,
खुशी का एक मुखड़ा दिखलाती है
वो मुखड़ा जिसके सामने हर दुखड़ा,
जिन्दगी मुस्कुराकर गाती है
जिसके सामने हर तकलीफ का एहसास भी,
जिन्दगी खुशी-खुशी कर जाती है
ये मुखड़ा ही तो है जिसके एहसास मात्र से,
जिन्दगी खुशनुमा बन जाती है;
अब क्या बताऊं वो कैसी है,
जिसका ये मुखड़ा है
कि जब से उसको देखा है,
मैं अपना सुध-बुध भूल गया हूँ
उसके मुखड़े का नूर देखकर,
मैं अपना ग़ुरूर भूल गया हूँ
उसके रूप का स्वरूप देखकर,
मैं अपना कुरूप भूल गया हूँ
जिसकी आँखो की मस्ती में छनकर,
मैं दुनिया भूल गया हूँ;
बस भूल गया हूँ मैं सब कुछ,
अपने से जुड़ी सारी बातें भूल गया हूँ
सिवाय उसके जिससे जुड़ी हर बातों का,
मैं जिक्र हो गया हूँ
जिसकी लहलहाती जुल्फों का,
मैं स्पर्श हो गया हूँ
और इस स्पर्श के एहसास का,
मैं इश्क-ए-परिन्दा हो गया हूँ
मैं उसका पूरा आशिक हो गया हूँ;
मेरी आस, मेरी बात, मेरे बोल, मेरे शब्द
मेरी पहचान, मेरी खुशी, मेरी जिन्दगी,मेरा एहसास
और क्या बचा, सब तो उसी का हो गया है
सिवाय उसके इस एहसास के,
कि उससे मेरा इश्क मेरी जिन्दगी का अक्स हो गया है;
लेकिन मुझे बस इसी एहसास में रहने दो,
उसकी खूबसूरत आँखों में मेरी नजर रहने दो,
मेरी दिल की धड़कनों में उसी का एहसास रहने दो ,
मेरे होंठों पर बस उसी का नाम रहने दो
कि मुझे उसी के इश्क में रहने दो… !
_Ankit Kumar Panda
#ankitakp #ankitkumarpanda

दिल अब इंसान हो चला है/Dil Ab Insaan Ho Chala Hai_Ankit AKP_Hindi Love Poetry 2018

1542720756676[1]” दिल अब इंसान हो चला है “

मेरा दिल कुछ पाक सा हो चला है 

मुझे नहीं पता किस कदर 

पर लगता है इंसान सा हो चला है 

वो इसांन जो हर बुराई से दूर, 

और अच्छाई पर चला है 

हर सुख-दु:ख पर, 

हर किसी के साथ चला है 

इस दिल को भी ऐसा ही कुछ एहसास हो चला है 

मेरा दिल अब इंसान हो चला है ;

अभी तो ये इंसान हो चला है 

पर कैसे बताऊं कि पहले क्या था दिल ये मेरा

जानवर तो नहीं कहूंगा,

कि जब से ये दिल इंसान हो चला है 

जानवरों का हमसे पाक होना पता चला है

बस यही समझिए कि दिल मेरा,

काम, क्रोध, मोह, लोभ, अहंकार इन सब से भरा था 

जहाँ दिमाग भी जैसे हमेशा बुराई पर ही चला था;

पर अब दिल जो है, 

इन सब से दूर हो चला है 

दिमाग भी जैसे शान्त हो चला है

मुझे नहीं पता ये सब कैसे और क्यूँ हो चला है

शायद इसलिए कि इस दिल को प्यार हो चला है

वो प्यार जो हमेशा अच्छाई पर ही चला है 

और इसी प्यार के साथ चलने के लिए,

ये दिल अब उस काबिल बन चला है 

जिस काबिल ये प्यार उसको इंसान कर चला है ;

बस ये प्यार ही है, जो इस दिल को पाक हुआ है 

जिसके चलते दिमाग दिल और दिल पाक हुआ है 

बस ऐसे ही ये दिल अब इंसान हो चला है,

क्योंकि इसे किसी से प्यार हो चला है! 

तुमसे प्यार हो गया है/Tumse Pyaar Ho gaya_Hindi Love Poetry or Shayari_2018_Ankit AKP

1543252039334[1]"तुमसे प्यार हो गया है !!"
वक़्त भी थम गया, 
सांसे भी थम गयी 
तुमने जब छुआ तो,
दिल की धड़कन भी गयी;
ना जाने क्या जादू हो गया 
कि हर वक़्त पर, 
तेरा काबू हो गया 
कभी ठहरा, कभी चला 
घड़ी की सुईयों पर भी, 
मानो तेरा जादू हो गया
ये वक़्त अब जैसे,
तेरा कठपुतली हो गया;
तेरा जादू तो मुझ पर भी यूँ हो गया 
कि तेरे साथ ही अब, 
मेरा कारवाँ हो गया;
अब तो मंजिल भी तू है, 
राह भी तू ही है 
तो फिर कहाँ जाऊं तुझसे दूर 
जो मेरी जिन्दगी का हर हिस्सा,
तेरे नाम हो गया 
लगता है मुझे....,
तुमसे प्यार हो गया है !!

तुम भी कर लिया करो/Tum Bhi Kar Liya Karo_Love Poetry or shayari_Ankit AKP_2018

1539847566189[1]”तुम भी कर लिया करो”

हल्की-फुल्की कोशिशें,

तुम भी कर लिया करो;

मोहब्बत है, कोई पाप नहीं

हम तो करते ही हैं,

कुछ तुम भी कर लिया करो;

ऐतबार है उस मोहब्बत पे हमको,

जो मोहब्बत हम तुमसे करते हैं

‘गर एेतबार हमारी मोहब्बत पे हो तुमको भी,

तो कुछ तुम भी कर लिया करो;

न सही मोहब्बत तुम हमसे खास करो

पर जितनी भी हो,

उसका तो इकरार करो

हम तो बोल-बोल कर न जाने कितनी दफा कह चुके,

कि प्यार है तुमसे

बस ऐसा ही इकरार कभी,

कुछ तुम भी कर लिया करो;

मैं कहता हूँ छोड़ो सारी बातें वहाँ

दो-चार बातें खास जो हम तुमसे करते हैं

बस वही थोड़ी बहुत बातें,

कुछ तुम भी कर लिया करो

कि तरसते हैं आवाज सुनने को तुम्हारी

पर तुम हो…कि मौन ही रहती हो;

वो तो भला हो तुम्हारी नजरों का,

जिसकी नुमाइश की आजमाइश ने मुझको ये जता रखा है,

कि हाँ! हमसे प्यार तो है तुमको

वरना हम तो रह जाते एकतरफा प्यार में;

लेकिन काश! ये इकरार तुम्हारी जुबां पर भी होता

हमारे बीच भी मीठी बातों का सिलसिला होता

न तुम ख़ामोश रहते, न हम बकबक करते

बस मोहब्बत यूं ही बेशुमार करते

मोहब्बत तो है पर तुम्हारा कुछ न बोलना,

बस ये एक शिकायत भी तुमसे है

‘गर ऐसी ही कुछ शिकायतें तुम्हारी भी हो,

तो कुछ तुम भी कर लिया करो;

मैं कहता हूँ हर शिकायत दूर होगी

तुमसे जुड़कर हर खुशी दुगिनी होगी

‘गर तुम्हारे होंठों पर भी हमारी मोहब्बत का जिक्र हो,

तो मोहब्बत ये और भी खास होगी;

पर न जाने कौन सी वो घड़ी होगी

जब हर घड़ी तुम मेरे पास होगी

हमारे बीच भी कसमों-वादों की लड़ी होगी

और हमारी मोहब्बत अपने आप में मुकम्मल होगी!

देख लो, कितनी ख़्वाहिशें हैं मोहब्बत की मेरी

ऐसी ही ख़्वाहिशें कभी,

कुछ तुम भी कर लिया करो;

कितना कुछ तो कह दिया,

अब और क्या ख़्वाहिश करूँ तुमसे

कह तो चुका हूँ,

मोहब्बत है, कोई पाप नहीं

हम तो करते ही हैं,

कुछ तुम भी कर लिया करो

इजहार मोहब्बत का जिस कदर हम करते हैं,

कुछ तुम भी कर लिया करो

मैं कहता हूँ कर लिया करो

जो महसूस हम करते हैं,

कुछ तुम भी कर लिया करो!!

पुरानी ऐनक / Purani Ainak_Ankit AKP

पुरा1534597720944[1]नी ऐनक के पीछे की,
ये आँखें भी अब पुरानी हो चुकी हैं
इतनी पुरानी….
कि वो छवि भी अब धुंधली सी दिखती याद आती है जिसे पहली बार इन आँखों ने,
अपनी इसी पुरानी ऐनक के पीछे से देखा था !