अभी-अभी /Abhi-Abhi _Hindi Sensitive poem

अभी-अभी तो वह
रेंगा था
लोगों ने उसे कुचलना
शुरू कर दिया;
उसने लोगों से अपनी
जान बचानी चाही
तो लोगों ने उसे
हमला समझ लिया;
आखिर क्या किया
गुनाह है उसने
जो लोग उसे
अपना दुश्मन समझ बैठे;
मिली जिन्दगी उसे वही
जो मिली जिन्दगी औरों को
फिर क्यों उसकी जिन्दगी का
मोल नहीं है कोई ;
है रूप-रंग अलग तो क्या
वह भी जीना जानता है
है कीट-मकोडों से पहचान तो क्या
वह भी प्रकृति को महसूस करना जानता है;
आखिर वह भी प्रकृति की ही रचना है
उसी की गोद में पलता है
जिन्दगी के सफर में
खुद का हमसफर बनकर चलता है
लेकिन फिर भी खेल
उसकी जिन्दगी का ऐसा क्यों
कि अभी-अभी जिन्दगी
और उसी अभी-अभी में उसे मौत मिल गयी,
मौत मिल गयी….
उसकी अभी-अभी की इस
दो पल की जिन्दगी के खेल से
मुझे मेरी जिन्दगी की कीमत का एहसास हो गया
लेकिन अभी-अभी…..

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