Hindi poetry_कैसे / Kaise_Ankit AKP_2018

1544333060834कैसे मैं खुद को बतलाऊँ
कि क्या हूँ मैं
कैसे इस जहान में
अपनी पहचान बनाऊँ मैं
कैसे उस मंजिल तक जाऊँ
जो लक्ष्य है मेरी जिन्दगी का
कुछ तो खास है मुझमें
कैसे यह खुद को विश्वास दिलाऊँ;
हर राह पर हो ईश्वर साथ मेरे
कैसे यह यह उम्मीद जताऊँ मैं
जिस भी राह पर जाऊँ,
वहाँ कदमों के निशान हो मेरे
कैसे यह ख्वाब सजाऊँ मैं
कभी मैं भी परिन्दा बनकर,
आसमान की ऊँची उड़ान भरूँ
कैसे यह ख़्वाहिश जताऊँ मैं
हाथ की लकीरें किस्मत और,
बंद मुट्ठी ताकत है मेरी
कैसे इस तरह आत्मविश्वास बढ़ाऊँ मैं;
आखिर कैसे अपने अन्दर की,
उस काबिलियत को पहचानुँ मैं
कि कभी भी मेरे मन में,
‘कैसे’ शब्द का ख्याल न आए
क्योंकि ‘कैसे-कैसे’ कहकर बस,
बहुत कर लिए खुद से सवाल मैंने
लेकिन कैसे भी था करना अब,
अपने से ये ‘कैसे’ दूर
क्योंकि अब मुझे अपने आप को,
सिर्फ जवाब देने थे !
#AnkitAKP #AnkitKumarPanda


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