Hindi poetry_कैसे / Kaise_Ankit AKP_2018

कैसे मैं खुद को बतलाऊँ कि क्या हूँ मैं कैसे इस जहान में अपनी पहचान बनाऊँ मैं कैसे उस मंजिल तक जाऊँ जो लक्ष्य है मेरी जिन्दगी का कुछ तो खास है मुझमें कैसे यह खुद को विश्वास दिलाऊँ; हर राह पर हो ईश्वर साथ मेरे कैसे यह यह उम्मीद जताऊँ मैं जिस भी राह … More Hindi poetry_कैसे / Kaise_Ankit AKP_2018

तुमसे प्यार हो गया है/Tumse Pyaar Ho gaya_Hindi Love Poetry or Shayari_2018_Ankit AKP

“तुमसे प्यार हो गया है !!” वक़्त भी थम गया,  सांसे भी थम गयी  तुमने जब छुआ तो, दिल की धड़कन भी गयी; ना जाने क्या जादू हो गया  कि हर वक़्त पर,  तेरा काबू हो गया  कभी ठहरा, कभी चला  घड़ी की सुईयों पर भी,  मानो तेरा जादू हो गया ये वक़्त अब जैसे, … More तुमसे प्यार हो गया है/Tumse Pyaar Ho gaya_Hindi Love Poetry or Shayari_2018_Ankit AKP

पुरानी ऐनक / Purani Ainak_Ankit AKP

पुरानी ऐनक के पीछे की, ये आँखें भी अब पुरानी हो चुकी हैं इतनी पुरानी…. कि वो छवि भी अब धुंधली सी दिखती याद आती है जिसे पहली बार इन आँखों ने, अपनी इसी पुरानी ऐनक के पीछे से देखा था !  

अभी-अभी /Abhi-Abhi _Hindi Sensitive poem

अभी-अभी तो वह रेंगा था लोगों ने उसे कुचलना शुरू कर दिया; उसने लोगों से अपनी जान बचानी चाही तो लोगों ने उसे हमला समझ लिया; आखिर क्या किया गुनाह है उसने जो लोग उसे अपना दुश्मन समझ बैठे; मिली जिन्दगी उसे वही जो मिली जिन्दगी औरों को फिर क्यों उसकी जिन्दगी का मोल नहीं … More अभी-अभी /Abhi-Abhi _Hindi Sensitive poem

अब मैं जिम्मेदार था/ Ab Main Jimmedar Tha

नादान था दुनिया से अनजान था; बेखबर हर बात से क्या झूठ, क्या सच, क्या बेईमानी, और क्या ईमान था; हमेशा बस मैं यही सोचता लोगों में कैसे इतना ज्ञान था दुनिया भर की खबर जो रखते भला उसमें क्या ईनाम था; अब किन-किन बातों में, किस-किस तरह का ज्ञान था हमारी किन-किन जरूरतों में, … More अब मैं जिम्मेदार था/ Ab Main Jimmedar Tha

वो इंसान है /Woh Insaan Hai_Ankit AKP

#वोइंसानहै पता नहीं कौन है, कहाँ से आया है ? पहचान पूछो तो इंसान बताता है, नाम पूछो तो काम बताता है पता नहीं किस जगह, किस जहान से आया है ? वंश पूछो तो बन्दर याद दिलाता है, मज़हब पूछो तो धर्म सिखाता है; न किसी धर्म का भगवान है, और न ही किसी … More वो इंसान है /Woh Insaan Hai_Ankit AKP