Hindi poetry_कैसे / Kaise_Ankit AKP_2018

कैसे मैं खुद को बतलाऊँ कि क्या हूँ मैं कैसे इस जहान में अपनी पहचान बनाऊँ मैं कैसे उस मंजिल तक जाऊँ जो लक्ष्य है मेरी जिन्दगी का कुछ तो खास है मुझमें कैसे यह खुद को विश्वास दिलाऊँ; हर राह पर हो ईश्वर साथ मेरे कैसे यह यह उम्मीद जताऊँ मैं जिस भी राह … More Hindi poetry_कैसे / Kaise_Ankit AKP_2018

तुम भी कर लिया करो/Tum Bhi Kar Liya Karo_Love Poetry or shayari_Ankit AKP_2018

”तुम भी कर लिया करो” हल्की-फुल्की कोशिशें, तुम भी कर लिया करो; मोहब्बत है, कोई पाप नहीं हम तो करते ही हैं, कुछ तुम भी कर लिया करो; ऐतबार है उस मोहब्बत पे हमको, जो मोहब्बत हम तुमसे करते हैं ‘गर एेतबार हमारी मोहब्बत पे हो तुमको भी, तो कुछ तुम भी कर लिया करो; … More तुम भी कर लिया करो/Tum Bhi Kar Liya Karo_Love Poetry or shayari_Ankit AKP_2018

अभी-अभी /Abhi-Abhi _Hindi Sensitive poem

अभी-अभी तो वह रेंगा था लोगों ने उसे कुचलना शुरू कर दिया; उसने लोगों से अपनी जान बचानी चाही तो लोगों ने उसे हमला समझ लिया; आखिर क्या किया गुनाह है उसने जो लोग उसे अपना दुश्मन समझ बैठे; मिली जिन्दगी उसे वही जो मिली जिन्दगी औरों को फिर क्यों उसकी जिन्दगी का मोल नहीं … More अभी-अभी /Abhi-Abhi _Hindi Sensitive poem

मुझे रावण का जलना बिल्कुल समझ न आया_Ankit AKP

न जाने कैसा मंजर था उस रावण-दहन में बच्चे की होंठों पे मुस्कान देखी, तो रावण का जलना समझ में आया लेकिन जब राम की भेष में धनुष उठाए उस शख़्स के चेहरे में एक सुकून भरी जैसी खुशी देखी, तब मुझे रावण का जलना समझ बिल्कुल न आया क्योंकि बच्चे के लिए तो जो … More मुझे रावण का जलना बिल्कुल समझ न आया_Ankit AKP

वो इंसान है /Woh Insaan Hai_Ankit AKP

#वोइंसानहै पता नहीं कौन है, कहाँ से आया है ? पहचान पूछो तो इंसान बताता है, नाम पूछो तो काम बताता है पता नहीं किस जगह, किस जहान से आया है ? वंश पूछो तो बन्दर याद दिलाता है, मज़हब पूछो तो धर्म सिखाता है; न किसी धर्म का भगवान है, और न ही किसी … More वो इंसान है /Woh Insaan Hai_Ankit AKP

“गर्मी के दिन हैं आयें/Garmi Ke Din Hain Aaye” #Summerseason

“गर्मी के दिन हैं आयें” #Summerseason फिर गर्मी के दिन हैं आयें साथ धूप की छाया लायें पंखा,कूलर,फ्रिज सब काम पे आयें जो बिल बिजली का दुगुना लायें भई! गर्मी के जो दिन हैं आयें; दिन-दोपहर को मानो जैसे सूरज दादा कहर बरसाए ऐसे में घर की चार दीवारी ही भाए जो उस कहर से हमें … More “गर्मी के दिन हैं आयें/Garmi Ke Din Hain Aaye” #Summerseason

झूठ भी है, सच भी है / Jhoot bhi hai, Sach bhi hai_ Ankit AKP

झूठ भी है, सच भी है बस फर्क इतना सा है कि झूठ सच को छिपाता है, और सच झूठ को दिखाता है ! और हाँ……हर झूठ के पीछे एक सच तो होता ही है लेकिन यह ज़रूरी नहीं कि सच के पीछे भी एक झूठ हो; झूठ को भले सच का सहारा लेना पड़ता … More झूठ भी है, सच भी है / Jhoot bhi hai, Sach bhi hai_ Ankit AKP

Two Liner Hindi Quotes “गलतियाँ समझदार होने पर ही क्यों होती हैं” _Ankit AKP

पता नहीं इंसान से तभी गलतियाँ क्यों होने लगती हैं, जब वह समझदार होने लगता है !!!