अभी-अभी /Abhi-Abhi _Hindi Sensitive poem

अभी-अभी तो वह रेंगा था लोगों ने उसे कुचलना शुरू कर दिया; उसने लोगों से अपनी जान बचानी चाही तो लोगों ने उसे हमला समझ लिया; आखिर क्या किया गुनाह है उसने जो लोग उसे अपना दुश्मन समझ बैठे; मिली जिन्दगी उसे वही जो मिली जिन्दगी औरों को फिर क्यों उसकी जिन्दगी का मोल नहीं … More अभी-अभी /Abhi-Abhi _Hindi Sensitive poem

मुझे रावण का जलना बिल्कुल समझ न आया_Ankit AKP

न जाने कैसा मंजर था उस रावण-दहन में बच्चे की होंठों पे मुस्कान देखी, तो रावण का जलना समझ में आया लेकिन जब राम की भेष में धनुष उठाए उस शख़्स के चेहरे में एक सुकून भरी जैसी खुशी देखी, तब मुझे रावण का जलना समझ बिल्कुल न आया क्योंकि बच्चे के लिए तो जो … More मुझे रावण का जलना बिल्कुल समझ न आया_Ankit AKP

अब मैं जिम्मेदार था/ Ab Main Jimmedar Tha

नादान था दुनिया से अनजान था; बेखबर हर बात से क्या झूठ, क्या सच, क्या बेईमानी, और क्या ईमान था; हमेशा बस मैं यही सोचता लोगों में कैसे इतना ज्ञान था दुनिया भर की खबर जो रखते भला उसमें क्या ईनाम था; अब किन-किन बातों में, किस-किस तरह का ज्ञान था हमारी किन-किन जरूरतों में, … More अब मैं जिम्मेदार था/ Ab Main Jimmedar Tha

वो इंसान है /Woh Insaan Hai_Ankit AKP

#वोइंसानहै पता नहीं कौन है, कहाँ से आया है ? पहचान पूछो तो इंसान बताता है, नाम पूछो तो काम बताता है पता नहीं किस जगह, किस जहान से आया है ? वंश पूछो तो बन्दर याद दिलाता है, मज़हब पूछो तो धर्म सिखाता है; न किसी धर्म का भगवान है, और न ही किसी … More वो इंसान है /Woh Insaan Hai_Ankit AKP